पैरी के ₹14.74 करोड़ से कुनकुरी के ₹30.58 करोड़ तक! ठेकेदार अनिल चंदेल का भ्रष्टाचार साम्राज्य, ₹53 करोड़ मंजूरी पर 67 करोड़ का भुगतान, अनुभव में आठ गुना छलांग और अब मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र में भ्रष्टाचार की नींव –

 

रायपुर – छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की पैरी परियोजना में स्वीकृति से ₹14.74 करोड़ अधिक भुगतान और भ्रष्टाचार की कहानी विधानसभा से निकलकर सरकारी जांच तक पहुंच गया हैं। इस पूरे भ्रष्टाचार में
ठेकेदार अनिल सिंह चंदेल मुख्य सरगना का नाम फ्रंट में है। चंदेल पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, नियम विरुद्ध सब-लेटिंग, निविदा पात्रता में हेरफेर और भुगतान में घोर अनियमितता के साथ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप है। मामला तब और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया जब जशपुर के कुनकुरी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृहग्राम में ₹30.58 करोड़ के आईबी डाइवर्सन कार्य की निविदा में भी चंदेल की फर्म को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप है। वहीं जल संसाधन विभाग मुख्यमंत्री के पास है। जुलाई में विधानसभा में चंदेल का नाम उठने के बाद सरकार ने पैरी भुगतान की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी है।

₹53.02 करोड़ मंजूर, ₹67.76 करोड़ भुगतान –
पैरी दायीं तट मुख्य नहर आरडी 6477 से 36900 मीटर तथा फिंगेश्वर वितरक शाखा के संबंधित हिस्से के लाइनिंग कार्य के लिए प्रशासनिक स्वीकृति ₹53.02 करोड़ थी। विभागीय रिकॉर्ड में अद्यतन व्यय ₹67.76 करोड़ पहुंच चुका है। यानी स्वीकृत राशि से करीब ₹14.74 करोड़ अधिक। इसी अतिरिक्त भुगतान की जांच के लिए अधीक्षण अभियंता संजय पाठक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति को भुगतान की प्रक्रिया, MIS, अधिकारियों की भूमिका और अतिरिक्त व्यय के आधार की जांच करनी है। जाँच में यह स्पष्ट होगा कि यह महज प्रक्रियात्मक चूक थी या इसके पीछे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की कोई कड़ी थी।

विधानसभा में दो बार उठा चंदेल का नाम –
11 जुलाई 2026 को विधायक विक्रम मंडावी ने पैरी परियोजना के भुगतान में अनियमितता का मामला विधानसभा में उठाया। वित्तीय निर्देशों की अनदेखी और ठेकेदार-अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई। इसके बाद 15 जुलाई को विधायक विध्यावती सिदार ने जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का मामला उठाया। इसमें भी अनिल सिंह चंदेल के अनुभव प्रमाणपत्र और सब-लेटिंग पर सवाल उठे। इस तरह चंदेल का नाम अब केवल शिकायत में नहीं, विधानसभा के सवालों और सरकारी जांच, दोनों में सामने आ चुका है।

₹270.87 लाख का अनुभव ₹2,180.79 लाख कैसे? –
चंदेल के मामले की सबसे अहम कड़ी उसके Largest Single Work अनुभव को लेकर है। वर्ष 2021-22 में उसका एकल कार्य अनुभव ₹270.87 लाख था। वहीं 2023-24 में यही अनुभव बढ़कर ₹2,180.79 लाख पहुँच गया। यानी कुछ ही समय में करीब आठ गुना छलांग। सवाल यह है कि ₹270.87 लाख का अनुभव अचानक ₹2,180.79 लाख कैसे हो गया? आखिर यह आधार किस अनुभव के तहत बनाया गया। उसका मूल ठेकेदार कौन था, वास्तविक काम किसने किया और चंदेल को कितना काम सब-लेट हुआ इनका जवाब वर्क ऑर्डर, MB, RA बिल, भुगतान रिकॉर्ड और अनुभव प्रमाणपत्र से ही मिलेगा।

अनुभव के पीछे सब-लेटिंग का खेल –
निविदा दस्तावेज की धारा 2.12 में सब-लेटिंग को लेकर शर्तें निर्धारित हैं। इन शर्तों का पालन किए बिना बड़े कार्य का अनुभव हासिल किया गया। जबकिं नियमों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक राशि का कार्य सब-लेट नहीं किया जा सकता और 25 से 50 प्रतिशत तक सब-लेटिंग के लिए शासन की अनुमति जरूरी है। ऐसे में ₹2,180.79 लाख के अनुभव का आधार अब जांच के केंद्र में है।

मुख्यमंत्री के गृहग्राम कुनकुरी का ₹30.58 करोड़ का टेंडर –
जशपुर के कुनकुरी ब्लॉक में आईबी डाइवर्सन कार्य की अनुमानित लागत करीब ₹30.58 करोड़ है। जबकिं ₹31.50 करोड़ की उच्च दर पर कार्टेल के माध्यम से यह निविदा अनिल सिंह चंदेल की फर्म को मिली। मामला इसलिए भी संवेदनशील है कि कुनकुरी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गृहग्राम है और जल संसाधन विभाग भी मुख्यमंत्री के पास है। इसलिए इस निविदा की तकनीकी पात्रता, वित्तीय बोली, प्रतिस्पर्धा और निविदा समिति के निर्णय की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

पैरी से कुनकुरी तक, जांच का दायरा बड़ा –
एक तरफ ₹53.02 करोड़ की स्वीकृति के मुकाबले ₹67.76 करोड़ का भुगतान, दूसरी तरफ चंदेल के अनुभव में ₹270.87 लाख से ₹2,180.79 लाख की छलांग, उसके साथ सब-लेटिंग के आरोप और फिर मुख्यमंत्री के गृहग्राम कुनकुरी का ₹30.58 करोड़ का टेंडर। इन सभी कड़ियों में एक नाम सामने आ रहा है अनिल सिंह चंदेल जो इस भ्रष्टाचार का सरगना है। अब जांच सिर्फ पैरी के अतिरिक्त भुगतान तक सीमित रही तो अनुभव प्रमाणपत्र, सब-लेटिंग और कुनकुरी की निविदा से जुड़े सवाल अनुत्तरित रहेंगे। जांच में MB, RA बिल, MIS भुगतान, अनुभव प्रमाणपत्र, मूल वर्क ऑर्डर, सब-लेटिंग अनुमति और कुनकुरी टेंडर की पूरी फाइल सामने आनी चाहिए।

अब विभागीय जांच से आगे की मांग –
यदि जांच में अतिरिक्त भुगतान नियमविरुद्ध पाया जाता है, अनुभव प्रमाणपत्र में गड़बड़ी या सब-लेटिंग के जरिए पात्रता हासिल करने की पुष्टि होती है, तो मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित रखने का नहीं होगा। ऐसे में FIR और ACB-EOW से आपराधिक जांच की मांग स्वाभाविक हो जाती है। फिलहाल मामला शिकायत से काफी आगे बढ़ चुका है। विधानसभा में आरोप उठे, चंदेल का नाम सामने आया और सरकार ने पैरी के भुगतान की जांच बैठा दी।

अब असली परीक्षा यह है कि जांच ₹14.74 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान से आगे बढ़कर उस पूरे सिस्टम तक पहुंचती है या नहीं, जिसने एक ठेकेदार के ₹2.70 करोड़ के अनुभव को कुछ ही वर्षों में ₹21.80 करोड़ तक पहुंचा दिया। और फिर सामने है मुख्यमंत्री के गृहग्राम कुनकुरी का ₹30.58 करोड़ का काम। पैरी की फाइल से कुनकुरी की टेंडर फाइल तक जांच पहुंची, तो अनिल चंदेल की ठेकेदारी की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

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