CAG जांच में 152 कार्यों में 43 एनीकट स्टॉपडैम भी घेरे में, अब निरतू-डोलमुआ की ड्राइंग-डिजाइन पर सवाल हरदीडीह के समय कार्यपालन अभियंता रहे सुरेश पांडेय अब मुख्य अभियंता –

₹7.10 करोड़ का चाटापारा एनीकट 14 महीने में धरासाई, CAG ने 48 जल संसाधन संभागों के 152 कार्यों में खोली गुणवत्ता की पोल सोनपुरी-नगोई में तीन अभियंताओं पर कार्रवाई, हरदीडीह में लगे गंभीर आरोपों के बीच अब निरतू-डोलमुआ के करीब ₹25-₹25 करोड़ के काम की तैयारी टेंडर से पहले ड्राइंग-डिजाइन पर उठे सवाल

बिलासपुर – अरपा पैरी के धार… जिस नदी के नाम से छत्तीसगढ़ का राज्यगीत शुरू होता है, उसी अरपा और आसपास बने एनीकटों के सरकारी रिकॉर्ड चौंकाने वाली कहानी सुना रहे हैं। कहीं करोड़ों की संरचना निर्माण के महज 14 महीने बाद भ्रष्टाचार की भेंट गई, कहीं जांच में अभियंताओं पर कार्रवाई हुई, हरदीडीह एनीकट के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगे और अब निरतू-डोलमुआ में निर्माण तथा टेंडर से पहले ही ड्राइंग-डिजाइन पर विभाग के भीतर से सवाल उठ रहे हैं। पुराने रिकॉर्ड और नए आरोपों को एक साथ रखें तो कहानी केवल खराब निर्माण की नहीं रह जाती। सवाल डिजाइन किसने बनाई, किसने स्वीकृत की, निर्माण किस आधार पर हुआ, गुणवत्ता किसने प्रमाणित की और करोड़ों का भुगतान कैसे निकला इस पूरी व्यवस्था पर खड़े होते हैं।

₹7.10 करोड़ का चाटापारा, 14 महीने में धराशायी –
CAG के मुताबिक जल संसाधन संभाग कोटा के चाटापारा-II एनीकट का अनुबंध क्रमांक 03/DL/2009-10 था और वास्तविक लागत ₹7.10 करोड़ दर्ज है। निर्माण 25 मार्च 2013 को पूरा हुआ और 25 मई 2014 को एनीकट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। यानी करोड़ों की संरचना 14 महीने में ही जवाब दे गई। CAG ने 28 जुलाई 2020 की तस्वीर में इसे पूरी तरह घटिया निर्माण और निम्न स्तर का बताया जिसकी वजह से आज सरंचना धरासाई हो गई। निर्माण की गुणवत्ता के आंकड़े इससे भी गंभीर हैं। M-10 कंक्रीट के 921 नमूनों की जांच अपेक्षित थी, लेकिन सिर्फ 28 हुईं और सभी अस्वीकार्य थीं। PCC M-15 में 153 के मुकाबले 3 और RCC M-20 में 162 के मुकाबले सिर्फ 10 नमूनों की जांच हुई, जिनके परिणाम भी स्वीकार्यता के मानक पर खरे नहीं उतरे। ऑडिट में ठेकेदार के खराब गुणवत्ता वाले काम और मैदानी अधिकारियों की निगरानी में कमी भी दर्ज हुई। जब जांच के नतीजे ऐसे थे तो काम स्वीकार किसने किया और करोड़ों का भुगतान किस आधार पर हुआ?

चाटापारा अकेला नहीं 48 संभाग, 152 कार्य और 43 एनीकट-स्टॉपडैम –
CAG की जांच जल संसाधन विभाग के 48 संभागों के 152 कार्यों तक पहुंची, जिनमें 43 एनीकट और स्टॉपडैम शामिल थे। इन कार्यों में कंक्रीट के 1,59,357 नमूना-इकाइयों का परीक्षण अपेक्षित था, लेकिन केवल 7,401 यानी 4.6 प्रतिशत की जांच हुई। इनमें भी 6,852 यानी करीब 93 प्रतिशत स्वीकार्यता के मानक पर खरे नहीं उतरे। CAG ने जांच के दायरे में ₹527.57 करोड़ के निम्न गुणवत्ता वाले कंक्रीट कार्य के क्रियान्वयन और विभाग द्वारा उसे स्वीकार किए जाने की बात दर्ज की।
यानी चाटापारा कोई अकेली कहानी नहीं, CAG के आंकड़े पूरे गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

सोनपुरी-नगोई लागत बढ़ी, एनीकट टूटा, तीन अभियंता दंडित –
सोनपुरी-नगोई एनीकट की शुरुआती राशि करीब ₹4.72 करोड़ और बाद में संशोधित आंकड़ा लगभग ₹6.02 करोड़ मिलता है। सरकार ने विधानसभा में माना कि वर्ष 2018 में अत्यधिक वर्षा के दौरान एनीकट क्षतिग्रस्त हुआ। इसके बाद विभागीय जांच में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एस.के. तिवारी, उप अभियंता एम.पी. शर्मा और बी.एम. सोनी के खिलाफ कार्रवाई कर उनकी एक-एक वेतनवृद्धि रोक दी गई। यदि नुकसान केवल बारिश से हुआ तो तीन अभियंताओं को दंड क्यों मिला? और यदि तकनीकी अथवा निर्माण संबंधी गड़बड़ी थी तो ठेकेदार से कितनी वसूली हुई और कार्यपालन अभियंता से मुख्य अभियंता स्तर तक किसकी जिम्मेदारी तय हुई?

हरदीडीह से निरतू-डोलमुआ तक, सुरेश पांडेय की भूमिका पर सवाल –
इस कहानी में हरदीडीह एनीकट महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके निर्माण और बाद में क्षतिग्रस्त होने को लेकर गंभीर आरोप लगे। उस दौरान संबंधित क्षेत्र में सुरेश पांडेय कार्यपालन अभियंता थे। अब वही सुरेश पांडेय मुख्य अभियंता हैं। यहीं से निरतू-डोलमुआ का मामला महत्वपूर्ण हो जाता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक निरतू में करीब ₹25 करोड़ और डोलमुआ में करीब ₹25 करोड़ के एनीकट कार्य की निविदा लगाने की तैयारी है। अभी टेंडर जारी नहीं हुआ है। इसलिए सवाल किसी निर्माण एजेंसी के किए काम पर नहीं, बल्कि टेंडर से पहले तैयार ड्राइंग-डिजाइन की तकनीकी मजबूती पर है। विभाग के भीतर से आरोप है कि निरतू-डोलमुआ की प्रस्तावित ड्राइंग-डिजाइन में ही तकनीकी गड़बड़ी है। यदि यह आरोप सही है तो निर्माण शुरू होने के बाद जांच का इंतजार क्यों किया जाए? अभी यह जांच होनी चाहिए कि डिजाइन किसने तैयार की, किस अधिकारी ने जांची और किस स्तर पर तकनीकी स्वीकृति दी गई। हरदीडीह में आरोपों के समय कार्यपालन अभियंता रहे सुरेश पांडेय अब मुख्य अभियंता हैं, इसलिए यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि हरदीडीह से विभाग ने क्या सबक लिया और निरतू-डोलमुआ की डिजाइन को मंजूरी देने से पहले पुराने मामलों की तकनीकी खामियों की समीक्षा हुई या नहीं?

गड़बड़ी निर्माण में नहीं, ड्राइंग से शुरू हुई तो? –
यही इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू है। निर्माण एजेंसी वही बनाती है जो स्वीकृत ड्राइंग और मात्रा के अनुसार उसे दिया जाता है। ऐसे में यदि मूल ड्राइंग-डिजाइन में ही तकनीकी कमी रह गई तो बाद में ठेकेदार पर पूरा दोष डालकर जिम्मेदारी खत्म नहीं की जा सकती। इसलिए निरतू-डोलमुआ की मूल परियोजना रिपोर्ट, प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, सामान्य विन्यास ड्राइंग, विस्तृत डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, जल प्रवाह गणना, मात्रा पत्रक और प्रस्तावित निविदा स्वतंत्र विशेषज्ञों के सामने रखी जानी चाहिए। साथ ही चाटापारा की CAG रिपोर्ट, सोनपुरी-नगोई की मूल जांच और हरदीडीह में निर्माण से क्षति तक अधिकारियों एवं ठेकेदार की जिम्मेदारी का रिकॉर्ड सामने आए। इससे साफ होगा कि गलती निर्माण स्थल पर हुई या उसकी शुरुआत डिजाइन की मेज से ही हो चुकी थी।

वर्तमान में जल संसाधन विभाग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास है। सरकार के सामने इस बार मौका है कि करीब ₹50 करोड़ के निरतू-डोलमुआ कार्यों का टेंडर जारी होने और निर्माण शुरू होने से पहले ही ड्राइंग-डिजाइन की स्वतंत्र तकनीकी जांच करा ले।

अरपा का नाम छत्तीसगढ़ के राज्यगीत की पहली पंक्ति में है। चाटापारा, सोनपुरी-नगोई और हरदीडीह का इतिहास सामने है। इसलिए इस बार सवाल एनीकट टूटने के बाद नहीं, बनने से पहले पूछा जाना चाहिए कि ड्राइंग किसने बनाई, किसने जांची और किसने मंजूर की? इन तीन जवाबों से ही पता चल सकता है कि निरतू-डोलमुआ की नींव कंक्रीट पड़ने से पहले कहीं कागजों में ही तो कमजोर नहीं कर दी गई।

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