निकाय चुनाव से पहले दुर्ग-भिलाई पुलिस में बड़ा फेरबदल, क्या चुनावी रणनीति के तहत हुई पोस्टिंग? विपक्षी खेमे में उठने लगे सवाल –

निकाय चुनाव से पहले दुर्ग-भिलाई पुलिस में बड़ा फेरबदल, क्या चुनावी रणनीति के तहत हुई पोस्टिंग? विपक्षी खेमे में उठने लगे सवाल –
रायपुर/दुर्ग : – निकाय चुनाव से पहले दुर्ग-भिलाई पुलिस महकमे में हुए तबादलों ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि इन नियुक्तियों से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। तबादला सूची में कई ऐसे अधिकारियों के नाम हैं, जिनके बारे में अतीत में राजनीतिक या चर्चित मामलों के संदर्भ में सार्वजनिक आरोप या विवाद सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि यह पूरी सूची अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।
सबसे पहले बात सर्वोत्तम मणि चंद्र की। उन्हें नगर पुलिस अधीक्षक (दुर्ग) से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) बनाया गया है। इन्हीं मणि चंद्र को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि उन्होंने कथित अफीम खेती वाले मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को घटनास्थल पर सलामी देकर भ्रमण कराया था, जबकि उस समय इसे क्राइम सीन मानते हुए अन्य किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी।
इसके बाद नाम आता है कौशलेन्द्र पटेल का। अब तक नगर पुलिस अधीक्षक (छावनी) रहे कौशलेन्द्र पटेल को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहीं से विपक्षी खेमे के सवाल और तेज हो जाते हैं। उनके खिलाफ पहले भी सार्वजनिक रूप से कई आरोप लगाए जा चुके हैं, जिनमें महादेव बेटिंग ऐप प्रकरण से जुड़े दावे भी शामिल रहे हैं। आरोप यह भी लगाए गए कि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के दौरान वह महिला के वेश में फरार हो गए थे और बाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा दिल्ली पुलिस की मदद से उन्हें वापस लाया गया था। आरोप लगाने वालों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले उन्हें यातायात की जिम्मेदारी दिए जाने से वाहनों की जांच और चुनावी गतिविधियों को प्रभावित किया जा सकता है।
इसी सूची में अगला नाम विशाल सोम का है, जिनके बारे में भी महादेव सट्टा ऐप से जुड़े होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। उन्हें यातायात डीएसपी बनाया गया है। आरोप यह भी है कि उन्होंने वैशाली नगर से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ एक अन्य प्रत्याशी को चुनाव लड़वाया और स्वयं उसके पक्ष में सक्रिय चुनाव प्रचार किया था। हाल के दिनों में उनसे जुड़े कई पोस्टर भी चर्चा का विषय बने रहे।
आगे देवांश राठौर, जो पाटन के उप पुलिस अधीक्षक थे, उन्हें भी दुर्ग भेजा गया है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि उनकी पत्नी पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू की रिश्तेदार हैं। वहीं चंद्र प्रकाश तिवारी, जो भूपेश बघेल सरकार के समय से पुलिस लाइन में डीएसपी के पद पर पदस्थ हैं, उन्हें यथावत रखा गया है। लाइन आरआई नीलकंठ वर्मा भी दुर्ग में ही बनाए गए हैं। इसी क्रम में अनंत साहू वर्तमान में गृह मंत्री के ओएसडी के रूप में कार्यरत हैं, जिसका भी राजनीतिक चर्चाओं में उल्लेख किया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार की ओर से इन तबादलों को लेकर कोई अलग स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। आधिकारिक तौर पर इन्हें सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि निकाय चुनाव के दौरान इन नियुक्तियों को लेकर उठ रही राजनीतिक चर्चाएँ कितना असर डालती हैं और क्या सरकार या पुलिस विभाग की ओर से इन सवालों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आती है।










