जीपीएम के नए कलेक्टर विजय दयाराम के सामने चुनौतियों का पहाड़, पर्यटन, बाईपास और अवैध खनन पर होगी बड़ी परीक्षा –

जीपीएम के नए कलेक्टर विजय दयाराम के सामने बड़ी चुनौती, पर्यटन, बैगा अंचल, बाईपास और अवैध खनन पर रहेगी नजर –

रायपुर – छत्तीसगढ़ कैडर के 2015 बैच के आईएएस विजय दयाराम ने रविवार को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के कलेक्टर का कार्यभार संभाल लिया। कर्नाटक के एक छोटे से किसान परिवार से निकलकर आईएएस बनने तक का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और मेहनत की मिसाल माना जाता है। लेकिन अब उनके सामने जो जिम्मेदारी है, वह किसी परीक्षा से कम नहीं है।

महज डेढ़ एकड़ खेती वाले परिवार में जन्मे विजय दयाराम का बचपन अभावों में बीता। गांव से कई किलोमीटर दूर साइकिल चलाकर स्कूल जाना, पढ़ाई के साथ खेतों में काम करना और परिवार की मदद के लिए सब्जियां बेचना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। आर्थिक तंगी ऐसी थी कि स्कूल और हॉस्टल की फीस जुटाने के लिए परिवार को कर्ज लेना पड़ा। बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर उन्होंने इंफोसिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया, लेकिन पिता की प्रेरणा पर नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी की और दूसरे प्रयास में आईएएस बने।

सेवा के दौरान उन्होंने सहायक कलेक्टर, एसडीएम, जिला पंचायत सीईओ, नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। धमतरी और कबीरधाम में पंचायतों के कामकाज, अंबिकापुर में स्वच्छता, बलरामपुर में पर्यटन विकास और बस्तर में प्रशासनिक समन्वय उनके कार्यकाल की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल रहे हैं।

अब जीपीएम की बारी, चुनौतियां भी कम नहीं
प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सबसे संभावनाशील जिलों में माना जाता है। अमरकंटक से सटा यह इलाका राजमेरगढ़ की ऊंची पहाड़ियों, घने जंगलों, जलप्रपातों और धार्मिक-इको टूरिज्म की अपार संभावनाओं से समृद्ध है। बावजूद इसके, जिले में पर्यटन का समग्र विकास अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।

जिले की बैगा बाहुल्य विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और आजीविका आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारियों में रहेगा।

पेंड्रा बाईपास भी लंबे समय से जिले की प्रमुख मांगों में शामिल है। तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में इसकी घोषणा हुई थी, लेकिन करीब 16 वर्ष बाद भी यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। शहर में बढ़ते यातायात और पर्यटन को देखते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाना नए कलेक्टर के सामने महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती होगी।

इसी तरह कोलेबिरा जलाशय परियोजना भी वर्षों से बहुप्रतीक्षित है। प्रभावी नेतृत्व और प्रशासनिक गति के अभाव में यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। यदि इस परियोजना को गति मिलती है तो सिंचाई, पेयजल और स्थानीय विकास को नई दिशा मिल सकती है।

जिले में अवैध रेत और खनिज उत्खनन, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण तथा पर्यटन स्थलों का अधूरा विकास भी प्रशासन के लिए गंभीर मुद्दे हैं। मध्यप्रदेश से सटी लंबी अंतरराज्यीय सीमा का कुछ असामाजिक तत्व अवैध गतिविधियों के लिए फायदा उठाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करना, सीमा चिन्हांकन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी नई प्रशासनिक टीम की प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

जीपीएम का विशाल वन क्षेत्र भालू, हाथी और दुर्लभ हनी बैजर (Honey Badger) जैसे वन्यजीवों का भी महत्वपूर्ण आवास है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भी प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।

संघर्ष से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचे विजय दयाराम अब ऐसे जिले की कमान संभाल रहे हैं, जहां प्रकृति ने भरपूर संभावनाएं दी हैं, लेकिन विकास की कई मंजिलें अभी बाकी हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वे पर्यटन, जनजातीय विकास, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी गति से काम कर पाते हैं।

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