छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी: – कैबिनेट की मंजूरी के बाद ड्राफ्ट की जिम्मेदारी जस्टिस रंजना देसाई समिति को, जानिए क्या बदल सकता है –

छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी: – कैबिनेट की मंजूरी के बाद ड्राफ्ट की जिम्मेदारी जस्टिस रंजना देसाई समिति को, जानिए क्या बदल सकता है –
रायपुर : – छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने UCC लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है,जिसके बाद अब इसके ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस काम की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति को सौंपी गई है।
सरकार का दावा है कि यह कदम प्रदेश की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था में एकरूपता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC की दिशा में आगे बढ़ने वाले राज्यों में शामिल हो गया है।
जनभागीदारी के साथ बनेगा कानून –
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून केवल बंद कमरों में नहीं बनेगा। समिति प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों बस्तर से लेकर सरगुजा तक आम नागरिकों, जनजातीय समूहों, धार्मिक संगठनों और विधि विशेषज्ञों से सुझाव लेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार विधानसभा में विधेयक पेश करेगी।
UCC की जरूरत क्यों?
वर्तमान में विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे निजी मामलों में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं। सरकार का मानना है कि UCC लागू होने से न्याय में एकरूपता आएगी और अदालतों में जटिलता कम होगी। महिलाओं को बराबरी के अधिकार मिलेंगे, खासकर संपत्ति और तलाक के मामलों में सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, जहाँ नागरिक की पहचान धर्म से नहीं, संविधान से तय होगी
क्या-क्या बदल सकता है? (संभावित प्रावधान) –
छत्तीसगढ़ में लागू होने वाले UCC का प्रारूप काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल से प्रेरित हो सकता है। इसमें कुछ प्रमुख बदलाव शामिल हो सकते हैं। विवाह का अनिवार्य पंजीकरण किसी भी धर्म में हुई शादी का 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा, नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को भी प्रशासन के पास पंजीकरण कराना होगा, गलत जानकारी देने पर सजा संभव है। वही संपत्ति में बेटों के समान बेटियों को भी अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा
बहुविवाह पर रोक –
सभी समुदायों के लिए एक पति/एक पत्नी का नियम लागू किया जा सकता है। जनजातीय पहचान पर विशेष फोकस किया जाएगा चूंकि छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि UCC के ड्राफ्ट में आदिवासी परंपराओं और उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, ताकि उनकी परंपराओं पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
राजनीतिक और सामाजिक मायने –
UCC को लेकर देशभर में पहले से ही बहस चल रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में इस दिशा में उठाया गया कदम आगामी चुनावी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब सभी की नजर ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह कानून सभी वर्गों के बीच संतुलन बना पाएगा? और क्या जमीन पर इसे लागू करना उतना ही आसान होगा, जितना कागजों में दिख रहा है? छत्तीसगढ़ में UCC की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। फाइलों में दिशा तय हो चुकी है, अब देखना यह होगा कि यह कानून ज़मीनी हकीकत में कितना प्रभावी साबित होता है और समाज के अलग-अलग वर्ग इसे किस तरह स्वीकार करते हैं।










