थाना या माफिया का दफ्तर? जीपीएम में कानून बंधक? गौरेला थाने में FIR का आरोपी कुर्सी पर! पुलिस की भूमिका पर गंभीर –

थाना या माफिया का दफ्तर? जीपीएम में कानून बंधक? गौरेला थाने में FIR का आरोपी कुर्सी पर! पुलिस की भूमिका पर गंभीर –
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : – जिले में कानून व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पत्रकार पर हमले के मामले में FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विवाद उस तस्वीर के सामने आने के बाद और गहरा गया है, जिसमें हमले के मामले में नामजद बताया जा रहा व्यक्ति जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू) कथित रूप से गौरेला थाने के काउंटर के पीछे कुर्सी पर बैठा मोबाइल चलाते दिखाई दे रहा है।
यह तस्वीर स्थानीय स्तर पर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के बीच एक ही सवाल उठ रहा है क्या किसी आरोपी का इस तरह थाने के भीतर बैठना सामान्य प्रक्रिया है? और यदि FIR दर्ज है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पत्रकार पर हमला और दर्ज FIR –
घटना 8 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। पत्रकार अमरकंटक-मैकल पर्वत क्षेत्र से रिपोर्टिंग कर लौट रहे थे। रास्ते में उनकी गाड़ी को एक कार, एक हाईवा और एक अन्य वाहन से घेर लिया गया। इसके बाद गाली-गलौज और धमकियों के बीच रास्ता रोका गया और लोहे की रॉड से ड्राइवर साइड के काँच पर वार किया गया, जिससे काँच टूटकर चालक सीट तक बिखर गया। घटना के बाद गौरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने FIR नंबर 0014/2026 दर्ज किया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ –
126(2), 296, 115(2), 351(3), 324(4), 304 और 3(5) लगाई गईं। FIR में जिन लोगों के नाम बताए जाते हैं उनमें जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू), लल्लन तिवारी और सुनील बाली शामिल हैं। घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी हमले में इस्तेमाल बताए जा रहे वाहन जब्त नहीं किए गए लोहे की रॉड जैसे कथित हमलावर औजार बरामद नहीं किए गए आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर भी स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई। इसी वजह से अब यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि क्या पुलिस किसी दबाव में है या फिर जानबूझकर कार्रवाई टाली जा रही है?
“लेनदेन” की चर्चा ने बढ़ाए सवाल –
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए कथित तौर पर बड़ा लेनदेन हुआ है। यह लेनदेन नीचे के ऊपर तक बाँटा गया है। इसके बाद से पुलिस इस माफिया के आगे बेबस और लाचार हो गई है। और माफिया के आगे नतमस्तक हो चुकी है। यह हम नही अब आम जनमानस भी पूछ रहा है कि यदि इतना गंभीर मामला भी कार्रवाई तक नहीं पहुँच पा रहा, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे?

सीएम दौरे में भी दिखा वही चेहरा –
चौंकाने वाली बात यह भी बताई जा रही है कि हाल ही में जिले में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान भी यही व्यक्ति खुले तौर पर कार्यक्रम में दिखाई दिया था। उस दौरान भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिस पर सवाल उठे थे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
हौसले बुलंद कानून बंधक माफिया चला रहा थाना –
अब सामने आई तस्वीर में वही व्यक्ति कथित रूप से गौरेला थाने के काउंटर के पीछे कुर्सी पर बैठा मोबाइल चलाते दिखाई दे रहा है। यह तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है क्या किसी नामजद आरोपी को थाने के भीतर इस तरह बैठने की अनुमति दी जा सकती है? और यदि ऐसा है, तो कानून की साख पर इसका क्या असर पड़ेगा? अब निगाहें डीजीपी और आईजी पर मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सवाल सीधे राज्य पुलिस मुख्यालय तक पहुँच गया है।
यदि तस्वीर और आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक FIR का मामला नहीं बल्कि पूरे पुलिस सिस्टम की विश्वसनीयता का प्रश्न बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आईजी स्तर पर तत्काल जांच के आदेश दिए जाएंगे? क्या नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी होगी? या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे फाइलों में दब जाएगा?










