नई विधानसभा में बड़ा खेल? सचिव दिनेश शर्मा पर गंभीर आरोप , टीवी, एसी और सरकारी संपत्ति के हिसाब पर उठे सवाल –

नई विधानसभा में बड़ा खेल? सचिव दिनेश शर्मा पर गंभीर आरोप , टीवी, एसी और सरकारी संपत्ति के हिसाब पर उठे सवाल –

रायपुर : – छत्तीसगढ़ की नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तथा छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की उपस्थिति में अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया था। इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मंचासीन थे। उस समय इसे राज्य की लोकतांत्रिक परंपरा और संस्थागत गरिमा का प्रतीक बताया गया था।

लेकिन अब नई विधानसभा के संचालन के साथ ही विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा की भूमिका को लेकर कई आरोप और चर्चाएँ सामने आ रही हैं, जिनमें सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन से लेकर प्रशासनिक निर्णयों तक में कथित गड़बड़ियों की बात कही जा रही है।

127 टीवी का हिसाब नहीं, सचिवालय पर सवाल –
जानकारी के अनुसार नई विधानसभा भवन के विभिन्न कार्यालयों में निर्माण के दौरान पीडब्ल्यूडी द्वारा लगभग 127 टीवी सेट लगाए गए थे। आरोप है कि बाद में इन टीवी सेटों को सचिवालय स्तर की सहमति से हटाया गया।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन टीवी सेटों को कहाँ भेजा गया, किसे सौंपा गया या किस भंडार में जमा किया गया इसका स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है।

इसी प्रकार पुरानी विधानसभा भवन में लगे लगभग 100 टीवी सेट भी अब उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं। यदि यह तथ्य सही है तो यह सरकारी संपत्ति के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

400 एसी और फर्नीचर रिकॉर्ड संदिग्ध –
सूत्रों के अनुसार पुरानी विधानसभा भवन से करीब 400 एयर कंडीशनर (स्प्लिट और विंडो एसी) हटाए गए थे। इसके अलावा बड़ी मात्रा में फर्नीचर, सजावटी सामग्री और लाखों रुपये मूल्य की मूर्तियों के स्थानांतरण की भी बात सामने आ रही है।

लेकिन आरोप है कि इन सामग्रियों के स्थानांतरण से संबंधित स्टॉक रजिस्टर, गेट पास या भंडारण का स्पष्ट दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही है तो यह सीधे-सीधे सरकारी संपत्ति के प्रबंधन में गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है।

सचिव दिनेश शर्मा की भूमिका पर सवाल –
इस पूरे प्रकरण में विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि दिनेश शर्मा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत के करीबी सहयोगी रहे हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अपने शुरुआती समय में वे गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और बाद में राजनीतिक संरक्षण में उनका प्रशासनिक सफर आगे बढ़ा।

विधानसभा सचिवालय से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं। विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था में गंभीर मामला विधानसभा लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्थाओं में से एक है।

ऐसे में यदि सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बन जाता है।

जांच की मांग –
इस पूरे मामले में अब कई स्तरों पर जांच की मांग उठने लगी है पुरानी और नई विधानसभा की सभी परिसंपत्तियों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए टीवी, एसी, फर्नीचर और अन्य सामग्री के स्टॉक रजिस्टर और गेट पास की जांच हो। विधानसभा सचिवालय के प्रशासनिक निर्णयों और प्रक्रियाओं की नियमों के अनुसार समीक्षा की जाए

इन आरोपों की सच्चाई क्या है, यह निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन यदि सरकारी संपत्ति और विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी पारदर्शी जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक मानी जा रही है।

(जारी…)
कल पढ़िए  Part-2 : नई विधानसभा के लोकार्पण शिलापट्ट में बदलाव का पूरा विवाद

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