आदिवासी मंत्री के बंगले में लक्ष्मी की कृपा बरस रही मारवाड़ी पर , कृषि और आदिम जाति विभाग का हुआ ठेका ,

आदिवासी मंत्री के बंगले में लक्ष्मी की कृपा बरस रही मारवाड़ी पर , कृषि और आदिम जाति विभाग का हुआ ठेका ,
रायपुर : – प्रदेश में पांच साल कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार को जनता ने किनारा करते हुए छत्तीसगढ़ में सुशासन की सरकार बनाया और आदिवासी बाहुल्य इस राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री को प्रदेश की कमान सौंपी . इतना ही नही कृषि और ट्राइबल जैसे विभाग की जिम्मेदारी आदिवासी और सबसे सीनियर नेता को दी गई इससे आदिवासियों में एक उम्मीद जगी थी कि अब आदिवासियों के हित की बात होगी मगर विडंबना देखिए मंत्री जी ने पूरा कृषि और आदिमजाति विभाग को ही एक लक्ष्मी पुत्र को ठेके में दे दिया . मंत्री जी ने तो साफ साफ कह दिया कि जो भी काम हो वह इसी लक्ष्मीपुत्र के माध्यम से ही होगा जिसका बराबर परसेंट भी फिक्स हो गया कि मंत्री जी का 20 % और लक्ष्मीपुत्र का 10 % मतलब 30 % कमीशन तो यही बंट जाएगा इसके बाद जिले के बाबू से लेकर तमाम लोगो को कमीशन बांटते हुए कमीशन 50% पहुँच जाएगा अब अंदाजा लगाइये 50 % जब कमीशन बंट जाएगा तो आधे रेट में काम कैसे होगा और काम की गुणवत्ता कैसी होगी .
कौन है वो लक्ष्मी पुत्र : –
अभी तक आपने सड़क , पुल , पुलिया , बांध जैसे निर्माण कार्यो को ठेके में दिए जाने की बात सुनी होगी मगर छत्तीसगढ के कृषि और ट्राइबल मिनिस्टर ने पूरे विभाग को ही रायपुर के एक लक्ष्मीपुत्र ठेकेदार राकेश अग्रवाल को ठेके में दे दिया है मंत्री जी के कार्यालय में पदस्थ लोग तो यह कहते है कि कोई भी काम हो मंत्री के बॉस राकेश अग्रवाल से मिल लीजिए काम वही से होगा . यह बात सिर्फ विभाग तक ही सीमित नही है यह चर्चा अब खुलेआम राजधानी से लेकर गली चौक चौराहों में होने लगी है इससे साय सरकार की भी खूब किरकिरी हो रही है .
मंत्री से ज्यादा जलवा लक्ष्मीपुत्र का : –
पूरे विभाग में मंत्री से ज्यादा जलवा लक्ष्मीपुत्र राकेश अग्रवाल का है पूरे विभाग की इनकी तूती इस कदर बोलती है कि एक पत्ता भी इस लक्ष्मीपुत्र के बिना नही डोलता आप मंत्री से आसानी से मिल लेंगे मगर इस लक्ष्मीपुत्र का जलवा सातवें आसमान में है इनका ऐश्वर्य तो देखते ही बनता है .
भले ही प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार के भ्रष्ट कारनामो के अनेको किस्से है मगर छत्तीसगढ़ के इतिहास में नही हुआ की किसी मंत्री ने पूरे विभाग को ठेके में दिया हो मात्र 6 महीनों में ही मोदीजी के मूल मंत्र”न खाऊंगा न खाने दूंगा” के परते उखड़ गई है .
सीनियर और कद्दावर नेता और लक्ष्मी पुत्र की जोड़ी का अहंकार सातंवे आसमान में है जो न तो भाजपा संगटन की सुन रहे न ही कार्यकर्ताओ की खुलेआम विभाग ठेके पर संचालित हो रहा है. अंदाजा लगाइये इसकी परिणीति क्या होगी यही कारण है कि भारी बहुमत से आई भाजपा के मंत्रीमंडल में अंतर्कलह शुरू हो गया है और लोकसभा चुनाव के पहले से कुछ मंत्रियों की छुट्टी होनें की खबरें दौड़ने लगी थी . अब देखना यह कि आखिर भाजपा सरकार मंत्रिमंडल बदलाव के क्या फैसला लेती है क्या पांच साल ऐसे ही ठेके में विभाग बंटेंगे या इस ठेकेदारी प्रथा पर लगाम लगेगी ।










