अफ़सर-ए-आ’ला (हर रविवार को सुशांत की कलम से)

अफ़सर-ए-आ’ला
(हर रविवार को सुशांत की कलम से)

छत्तीसगढ़ी जायका बना लिट्टी चोखा –
फरा, चीला, मुठिया, ठेठरी, से कब छत्तीसगढ़ी जायके में लिट्टी चोखे ने जगह बना ली पता ही नही चला । बात सिर्फ जायके तक सीमित होती तो ठीक था मगर यहाँ मसला अलग है । हालात यह है कि नेता , अधिकारी , सलाहकार , प्रभारी , सासंद , पुलिस , हर जगह लिट्टी चोखा खाने वालों की तादात ज्यादा है तो स्वाद में बदलाव आना लाजमी है ।
कल छत्तीसगढ़ में मिनी इंडिया कहे जाने वाले शहर समेत कई जगहों पर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने छत्तीसगढ़ में आयोजित बिहार दिवस को लेकर सड़को में उतरकर प्रदर्शन किया और छत्तीसगढ़ी जायके के साथ छत्तीसगढ़ियों के हक की बात की । यह हालात आज अचानक नही बने है राज्य बनने के बाद से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया अपने अस्तित्व की बाट जोह रहा है ।
पिछली सरकार में भी छत्तीसगढ से एक भी छत्तीसगढ़िया को राज्यसभा सांसद नही बनाया तब बिहार से आने वाली रंजीता रंजन और राजीव शुक्ला को छत्तीसगढ से राज्यसभा भेजा गया । भाजपा कांग्रेस दोनों के शासन में छत्तीसगढ़ में बिहार के लाला खूब फले फुले । वर्तमान में प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री है उन्हें जल्दी ही राज्य के जायके में फरा चीला वापस लाना होगा अन्यथा आगामी समय मे एक उपाय ही बचेगा दोनों ही राष्ट्रीय दल को विधानसभा मे एकमत से प्रस्ताव पास कर छत्तीसगढ का विलय बिहार मे कर देना पड़ेगा । जब नेता , अधिकारी , सलाहकार , प्रभारी , सासंद , पुलिस , पत्रकार सब बिहारी है
और उन्ही के हाथों प्रदेश की कमान चलनी है
तो विलय हो ही जाना चाहिए और इसी के साथ ही छत्तीसगढ के मनवा कुर्मी क्षत्रियो को भी नीतीश कुमार के रूप मे कुर्मी CM मिल जायेगा ।

एनकाउंटर स्पेसलिस्ट इसलिए नही होगी एफआईआर , मिलेगी पद्दोनती –
13 , 14 मार्च की रात पटियाला में पंजाब पुलिस के मुलाजिमों ने सिलिव ड्रेस में सेना में सेवारत कर्नल पुष्पेंद्र सिंह और उनके बेटे पर बेरहमी से मारपीट कर दी । शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नही की और यह दलील दी कि जिन पर आरोप लग रहे है उन्हें डीआईजी ने एनकाउंटर स्पेसलिस्ट के रूप में सम्मानित किया है और जल्दी ही उन्हें पद्दोनती मिलने वाली है । इस कुतर्क के बाद मामला तूल पकड़ा जिसकी गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी । अब मामले सरकार ने मजिस्ट्रेड जांच के आदेश दिए है । दरअसल अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी दो ग्रेड में बंटा है एक जो नियम कानून से काम करता है और दूसरा वह जो खुद के बनाये नियम को समाज मे थोपता है । वर्ष 2021 में छत्तीसग़ढ़ में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई जब पुलिस के अधिकारियों ने ईमानदार और नियम कानून के काम करने वाले अधिकारी पर सरकार के इशारे में राजद्रोह , आय से अधिक संपत्ति , और मनगढ़ंत सोना प्लांट की गाथा गढ़ी थी । जिनपर यह आरोप लगा था तब वह एडीजी रैंक के सीनियर आईपीएस अधिकारी थे । उनके ही कनिष्ठ अफसरों ने ऐसा मकड़जाल फैलाया की आज वह अपने ही फैलाये जाल में उलझ गए है । तीन साल की न्याय की लड़ाई लड़कर वह सीनियर अफसर न सिर्फ बहाल हुए बल्कि उन्हें डीजी प्रमोट भी किया गया । मगर ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाही अब तक नही हुई । जिन्होंने सिंडिकेट बनाकर ऐसे अनेको षणयंत्र रचे जिसकी बानगी है आज कई आईएएस अधिकारी समेत व्यापारी जेल की सलाखों के पीछे है । इस तरह अपने नियम कानून थोपने वाले अफसरों पर लगाम लगाने की जरूरत है यह नौकारशाह खुद को तानाशाह समझ बैठे है । भ्रष्टाचार में लिप्त ऐसे अफसरों आय संपत्ति की जांच समेत इनके कारनामो की सीबीआई जांच कराए जाने की जरूरत है ताकि कानून पर जो भरोषा उठ रहा है वह मजबूत हो सके ।

वित्त का गणित महतारियों पर भारी –
छत्तीसगढ़ की महिला बाल विकास मंत्री जी ने इस बार विधानसभा को पिछले सत्र से बेहतर संभाला और अनुभवी भी हो गईं है ये भी जता दिया था । लेकिन एक कहावत है कि करे कोई भरे कोई । मामला ये है कि महतारी वंदन योजना में हर माह 1000 रु देने की योजना बनी । चुनावी घोषणा पत्र था तो अमल तय था । लेकिन वित्त विभाग की अपनी मुसीबत थी । रिटायर्ड आई ए एस वित्त मंत्री और वित्त सचिव ने हर योजना में कम से कम पैसा खर्च करने का जुगाड बनाया । बस ,हो गया खेला । समाज कल्याण विभाग की 500 रु प्रतिमाह पाने वाली महिला को महतारी वंदन में सिर्फ 500 रु दिया गया । कुल मिलाकर मिल गए एक हजार । इसी पर सवाल पर सवाल और बवाल खड़े हुए । जो महिला 500 रु पेंशन पा रही थी उसको 1500 की उम्मीद थी पर मिला सिर्फ एक हजार । अब वंदन और पेंशन का अंतर इन्हें कौन समझाए । अब भाई मोदी की गारंटी थी जो पूरी हुई । मोदी जी ने थोड़ी कहा था जो मिल रहा है उसे छोड़कर वंदना होगी । समझने वाले समझ गए जो ना समझे वो अनाड़ी हैं ।

विधानसभा में गलत जानकारी –
पहले विधानसभा सत्र शुरू होने के पहले अधिकारियो के हाथ पांव फूलने लगते थे और वह चाहकर भी गलती करने से बचते थे कही मामला विधानसभा में न उठ जाए इससे बचने के लिए अधिकारियों ने एक नई तरकीब ढूंढ निकाली और विधानसभा में गलत जानकारी प्रेसित कर दी । दरअसल पामगढ़ के कांग्रेस से विधायक शेषराज हरवंश ने इंदिरा निकुंज माना रोपणी संबधित स्व सहायता समूह के कार्य संचालन की जानकारी मांगी थी । मामले में वन मंत्री केदार कश्यप को जो जानकारी उपलब्ध कराई गई वह भ्रामक एवं गलत निकली । मामले में वन विभाग के पांच अधिकारी कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है । मगर सवाल यह उठता है कि इन अधिकारियों – कर्मचारियो को इतनी ताकत कहा से मिलती है कि यह विधानसभा की कार्रवाही को भी गंभीरता से नही लेते है । क्या इन्हें उच्चाधिकारियों का संरक्षण मिला है । समितियों में गड़बड़झाला का यह कोई पहला मामला नही है इसके पहले भी समितियों के घोटाले उजागर होते रहे है अधिकारी निलंबित होते है फिर क्लीन चिट के साथ बरी हो जाते है । इसका जीता जागता उदाहरण है मरवाही वनमंडल का नेचर कैम्प घोटाला , मनरेगा घोटाला जिसमे तत्कालीन पंचायत मंत्री सिंहदेव ने भरे सदन से 15 लोगो को निलंबित कर दिया था आज वह सभी अधिकारी बहाल हो गए है और विभाग कहता है विभागीय जांच चल रही है ।

सत्ता और संघठन में तकरार – 
सत्ता और संघठन में कुछ ठीक नही चल रहा है तत्कालीन सरकार के नौकरशाह अब भी सत्ता के इर्द गिर्द अपनी जगह बना लिए है । वही सत्ता और संघठन के तकरार पैदा कराने की जी तोड़ मेहनत में लगे है । असल में इस तकरार में उन चंद नौकरशाहो अपना निजी हित साध रहे है वह जानते है कि अगर सत्ता और संघठन एक होकर काम करेगी तो वह इन नौकरशाहो के गले का फांस बन जायेगा इसलिए नौकरशाहो ने योजनाबद्ध तरीके से सत्ता को कमजोर करने और ठीकरा संघठन पर फोड़ने की प्लानिंग बनाई है , और वह इसमे सफल भी होते दिखलाई पड़ रहे है । खबर है कि जल्द ही देश मे भाजपा के नए अध्यक्ष की घोषणा हो के साथ ही राज्यो में संघठन महामंत्रियों के फेरबदल भी होना तय है । संकेत है छत्तीसगढ़ में भी संघठन महामंत्री की बिदाई होने वाली है इस बिदाई से हाउस में बैठे कुछ नौकरशाह राहत की सांस लेंगे , और सत्ता सरकार को यह अपने हिसाब से चला पाएंगे ।

यक्ष प्रश्न

1. वो कौन से आई ए एस ऑफिसर हैं जिनकी हाल ही में पेशी मुख्यमंत्री जी के सामने हुई वो भी फाइलें रोकने को लेकर ?

2 . मंत्रिमंडल में कौन पावरफुल बाहर होगा और कौन पावरफुल अंदर होगा?

3 . 94 बैच के उस आईपीएस का नाम बताइए जो काडर चेंज के बाद भी अपनी वरिष्ठता कायम रखने में सफल रहा ! क्या यह अखिल भारतीय सेवा अधिनियम में है ?

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