रायपुर रेल मंडल का रेल परिचालन की संरक्षा और सुगमता की दिशा में बढ़ते कदम

00 यात्रियों की सुरक्षित रेल यात्रा हेतु गर्डर लॉन्चिंग के साथ-साथ सुधारात्मक कार्य
रायपुर। रेलवे प्रशासन द्वारा अधोसंरचना विकास के कार्यों को शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी संदर्भ में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के अंतर्गत हथबंद-भाटापारा सेक्शन के लेवल क्रॉसिंग संख्या 389 (कुकराचुंडा) पर रिलीविंग गर्डरों के लॉन्चिग कार्य के लिए 13/ 14 फरवरी को ट्रैफिक कम पावर ब्लॉक लिया गया था । यह सेक्शन हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग पर स्थित है। इस लेवल क्रॉसिंग का कुल यातायात इकाई 48,995 है तथा यह कुकराचुंडा, मोहभट्टा एवं आसपास के अनेक गाँवों को महत्वपूर्ण संपर्क सुविधा प्रदान करता है।
इस मार्ग के बिलासपुर-रायपुर सेक्शन में ट्रेनों की अनुमेय गति बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटा कर दी गई है। अत: आम जनता की सुरक्षा एवं परिचालन संरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस लेवल क्रॉसिंग पर आर.यू.बी. (रोड अंडर ब्रिज) का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है। आर.यू.बी. हेतु गर्डर लॉन्चिंग का कार्य दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा रात्रि ब्लॉक अवधि 01:10 बजे से 05:10 बजे तक नियंत्रित ट्रेन संचालन के साथ सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।
गर्डर लॉन्चिंग कार्य के अतिरिक्त, मेगा ब्लॉक / शैडो ब्लॉक के दौरान निम्नलिखित सहायक कार्य भी एक साथ निष्पादित किए गए:
(1) निपानिया में 2 टर्नआउट का ब्लास्ट क्लीनिंग मशीन द्वारा डीप स्क्रीनिंग।
(2) भिलाई में 11 केवी ओवरहेड लाइन का डिस्मैंटलिंग।
(3) प्रोजेक्ट यूनिट द्वारा 12 पोर्टल (2म25 केवी प्रणाली) का इरेक्शन।
(4) 2 टीडब्ल्यू एसईजे का इन्सर्शन।
(5) 4 ग्लूड जॉइंट का नवीनीकरण।
(6) 2 स्कैब्ड रेल का नवीनीकरण तथा डीएफडब्ल्यूएन का हटाना (नवीनीकरण की आवश्यकता वाले दोषपूर्ण वेल्ड) को हटाया गया।
(7) टीओ-2 का टैम्पिंग।
(8) प्लेन ट्रैक का टैम्पिंग।
(9)नॉन-स्टैण्डर्ड ओएचई सुधार हेतु भिलाई रेलवे स्टेशन पर 07 पोर्टल बूम का इरेक्शन।
(10) भिलाई टीएसएस में 11 एल्युमिनियम क्रॉस-फीडर को कॉपर में परिवर्तित करना।
मंडल रेल प्रबंधक श्री दयानंद ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षित रेल यात्रा हेतु गर्डर लॉन्चिंग के साथ-साथ सभी आवश्यक सुधारात्मक कार्य निर्धारित ब्लॉक अवधि के भीतर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सुरक्षित रूप से पूर्ण कर लिए। इससे हथबंद-भाटापारा की अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।

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