शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आर.टी.ई. सीटों में ऐतिहासिक वृद्धि

00 पहली कक्षा को एकमात्र प्रवेश बिंदु बनाए जाने से पारदर्शिता सुनिश्चित
रायपुर। राज्य शासन द्वारा नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केवल कक्षा पहली को प्रवेश कक्षा निर्धारित किया गया है। इस निर्णय से आर.टी.ई. सीटों के प्रकटीकरण में हो रही अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग समूह के बच्चों को अधिनियम का पूर्ण लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा।
पूर्व व्यवस्था में हुआ सुधार
पूर्व में नर्सरी, केजी-1 एवं कक्षा पहली – तीनों को प्रवेश कक्षा के रूप में निर्धारित किया गया था। इस व्यवस्था का कुछ निजी विद्यालयों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा था। बड़ी एवं नामी निजी शालाएँ नर्सरी को प्रवेश बिंदु घोषित कर उसकी क्षमता कम दर्शाती थीं और उसी आधार पर 25 प्रतिशत आर.टी. ई. सीटों का प्रकटीकरण करती थीं। जबकि वास्तविकता में वही विद्यालय कक्षा पहली में 4 से 5 सेक्शन संचालित कर अधिक संख्या में सामान्य विद्यार्थियों को प्रवेश देते थे। परिणामस्वरूप आर.टी.ई. सीटों की संख्या वास्तविक क्षमता के अनुरूप प्रदर्शित नहीं होती थी, आईएसएसई आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के और वंचित वर्ग के बच्चों को अधिनियम का समुचित लाभ नहीं मिल पाता था।
दूसरी ओर कुछ छोटी निजी शालाएँ नर्सरी, केजी-1 एवं कक्षा पहली में से दो को प्रवेश कक्षा घोषित करती थीं तथा अपनी वास्तविक क्षमता से अधिक सीटें प्रदर्शित कर अधिक संख्या में आर.टी.ई. प्रवेश लेती थीं। इन विद्यालयों का संचालन मुख्यत: शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति राशि पर निर्भर रहता था। शैक्षणिक स्तर अपेक्षाकृत निम्न होने के कारण सामान्य वर्ग के विद्यार्थी अन्य निजी विद्यालयों में स्थानांतरित हो जाते थे, जिससे इन शालाओं में आर.टी.ई. विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो जाती थी। बार-बार विद्यालय परिवर्तन से दुर्बल एवं वंचित वर्ग समूह के बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता भी प्रभावित होती थी।
शासन का नया निर्णय – पारदर्शिता की दिशा में ठोस कदम
राज्य शासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से केवल कक्षा पहली को प्रवेश कक्षा घोषित करने का निर्णय लिया है। अब आर.टी.ई. सीटों का निर्धारण यू-डाइस पोर्टल पर दर्ज गत वर्ष की कक्षा पहली की प्रविष्ट संख्या के आधार पर किया जा रहा है। इससे निजी शालाओं द्वारा नोडल अधिकारियों को दी जाने वाली गलत अथवा भ्रामक जानकारी पर अंकुश लगा है। साथ ही, इस निर्णय से स्तरहीन निजी शालाओं के संचालन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
आर.टी.ई. सीटों में अभूतपूर्व वृद्धि
नए निर्णय के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। गत वर्ष कक्षा पहली में केवल 9375 आर.टी.ई. सीटों का प्रकटीकरण किया गया था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 19 हजार 489 हो गया है। वर्ष 2025-26 में राज्य की निजी शालाओं में आर.टी.ई. अंतर्गत केजी-2 में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या 35 हजार 335 है, जो आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा पहली में प्रवेश करेंगे। इस प्रकार वर्ष 2026-27 में कक्षा पहली में कुल 54 हजार 824 बच्चों को प्रवेश मिलेगा, जो गत वर्ष की कुल 53 हजार 325 आर.टी.ई. सीटों से अधिक है। यह वृद्धि शासन की पारदर्शी एवं प्रभावी नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।
विरोध के कारण एवं शासन की प्रतिबद्धता
पारदर्शिता एवं जवाबदेही को सुदृढ़ करने वाले इस निर्णय से कुछ बड़ी एवं छोटी निजी शालाओं में असंतोष देखा जा रहा है, क्योंकि अब सीट प्रकटीकरण में की जा रही अनियमितताओं की संभावना समाप्त हो गई है तथापि राज्य शासन दुर्बल एवं वंचित वर्ग समूह के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है। यह निर्णय शिक्षा के अधिकार को वास्तविक रूप में लागू करने, समान अवसर प्रदान करने तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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