इन्द्रावती-जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में अस्थाई व्यवस्था से छग काे 2 क्यूमेक से बढ़कर 5.32 क्यूमेक पानी मिलने लगा

जगदलपुर। जल संसाधन विभाग से जारी जानकरी के अनुसार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और सिंचाई मंत्री केदार केश्यप की पहल पर राजस्थान के उदयपुर में केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जल परिषद की बैठक में इस मुद्दे को सिंचाई मंत्री केदार केश्यप ने प्रमुखता से उठाया। बैठक में उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। समस्या को देखते हुए तय हुआ कि इसका समाधन निकाला जाए। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के उड़ीसा प्रवास के दौरान वहां के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के साथ मुलाकात में इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करवाने के बाद तत्काल कवायद शुरू हो गई। दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग एवं प्रशासनिक अमले के द्वारा संयुक्त अवलोकन किया गया। इसके बाद अस्थाई तौर पर छत्तीसगढ़ की ओर जल प्रवाह में रुकावट बन रहे समस्याओं का निराकरण किया गया। जिसके बाद 2 क्यूमेक से बढ़कर अब छत्तीसगढ़ राज्य की ओर 5.32 क्यूमेक जल प्रवाहित हो रहा है।
राजेश सुकुमार टोप्पो सचिव जल संसाधन छत्तीसगढ़ के अनुसार उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ राज्यों के बीच सचिव स्तरीय वार्ता में बस्तर जिले में गहराते पेयजल संकट को दृष्टिगत रखते हुए के द्वारा छत्तीसगढ़ के हितों की रक्षा और जल बंटवारे को सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान पर जोर दिया गया। इन्द्रावती-जोरा नाला मुहाने पर बने कंट्रोल स्ट्रक्चर के दोनों ओर जमा रेत, पत्थर, मिट्टी और अन्य अवरोधों को स्थायी रूप से हटाने के लिए जल संसाधन विभाग उड़ीसा द्वारा उड़ीसा सरकार को प्रस्तुत साढ़े तीन करोड़ रुपये के प्राक्कलन को यथा शीघ्र स्वीकृति हेतु सचिव जल संसाधन उड़ीसा से आग्रह किया जिस पर सचिव उड़ीसा ने सहमति दी है। स्वीकृति मिलने के बाद एजेंसी तय कर जून 2025 तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
राजेश सुकुमार टोप्पो ने बताया कि बस्तर जिले में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट को देखते हुए छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के अधिकारियों ने 27 फरवरी और 21 मार्च 2025 को इन्द्रावती-जोरा नाला के मुहाने का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान बनी सहमति के अनुसार कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत, लूज बोल्डर, रेत बोरी और अन्य अवरोधों को हटाकर अस्थायी रास्ता बनाया गया। इस कार्य को 30 मार्च 2025 तक पूरा किया गया। इस तरह से अस्थाई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग द्वारा 11 अप्रैल को कंट्रोल स्ट्रक्चर में किए गए मापन में देखा गया की इंद्रावती नदी में जल का प्रवाह 5.32 क्यूमेक हो गया जो मार्च के अंतिम सप्ताह में 2 क्यूमेक तक गिर गया था। इंद्रावती में बढ़े जल प्रवाह का लाभ छत्तीसगढ़ राज्य को भी मिल रहा है। अब छत्तीसगढ़ राज्य की ओर 5.32 क्यूमेक जल प्रवाहित हो रहा है, अगर इसी प्रकार की स्थिति रही तो बस्तर जिले में जल की उपलब्धता प्रभावी रूप से हो सकेगी साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए प्रयाप्त जल मिल सकेगा।
उल्लेखनिय है कि जोरा नाला की समस्या की जड़ ग्राम सूतपदर है, जहां उड़ीसा सीमा पर इन्द्रावती दो धाराओं में बंट जाती है। एक धारा इन्द्रावती नदी के रूप में पांच किलोमीटर उड़ीसा में बहकर ग्राम भेजापदर से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करती है। यह धारा आगे जगदलपुर और चित्रकोट होते हुए गोदावरी में मिलती है। दूसरी धारा जोरा नाला के रूप में 12 किलोमीटर बहकर शबरी (कोलाब) नदी में मिलती है। पहले दोनों धाराओं में पानी बराबर बंटता था। समय के साथ जोरा नाला का बहाव बढ़ता गया और इन्द्रावती का बहाव घटता गया। छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में निर्णय लिया गया कि इन्द्रावती-जोरा नाला संगम पर 50-50 प्रतिशत जल बंटवारे के लिए पक्का स्ट्रक्चर बनाया जाएगा, जिसके बाद कंट्रोल स्ट्रक्चर का निर्माण भी कर लिया गया, लेकिन रेत-पत्थर के अवराेध से पुन: वही स्थिति निर्मित हाेने लगी, जिसका अस्थाई समाधान निकाला गया है। विदित हाे कि इंद्रावती का उद्गम उड़ीसा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल नाम के गांव से हुआ है। इंद्रावती नदी 164 किमी उड़ीसा राज्य में बहने के बाद 9 किमी लंबाई में छत्तीसगढ़ और उड़ीसा की सीमा बनाते हुए छत्तीसगढ़ में प्रवेश करती है एवं 232 किमी छतीसगढ़ में बहने के बाद 129 किमी महाराष्ट्र एव छत्तीसगढ़ की सीमा बनाते हुए गोदवारी नदी में मिलती है। इस प्रकार ये नदी 534 किमी बहने के बाद उद्गम स्थल से निकलकर गोदावरी में मिलती है।

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