अरपा-भैंसाझार मुआवजा घोटाला दो साल बाद भी ज्यादातर दोषी अफसर कार्रवाई से बाहर –

अरपा-भैंसाझार मुआवजा घोटाला दो साल बाद भी ज्यादातर दोषी अफसर कार्रवाई से बाहर –

बिलासपुर/रायपुर – अरपा-भैंसाझार वृहद परियोजना के भू-अर्जन और मुआवजा वितरण में करोड़ों की अनियमितताओं का खुलासा हुए दो साल हो गए, लेकिन विभागीय स्तर पर अब तक केवल चुनिंदा अफसरों पर ही कार्रवाई हुई है। जल संसाधन और राजस्व विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारी आज भी पदों पर हैं, कुछ तो प्रमोशन पाकर ऊंची कुर्सियों पर बैठ चुके हैं।

परियोजना और घोटाले की पृष्ठभूमि
अरपा नदी पर प्रस्तावित अरपा-भैंसाझार वृहद सिंचाई परियोजना से 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ सिंचाई का लक्ष्य रखा गया था। वर्ष 2023 में भू-अर्जन प्रक्रिया शुरू हुई। जांच में सामने आया कि मुआवजा वितरण में कई खसरे (भूमि अंकों) के रकबे को अलग-अलग दर्शाकर और नक्शे में नहर की एलाइमेंट बदलकर गलत भुगतान किया गया। कई मामलों में नहर जिन जमीनों से गुज़री ही नहीं, वहां भी करोड़ों का मुआवजा दे दिया गया। अकेले एक खसरे में ₹3.42 करोड़ की अनियमितता दर्ज हुई। कुल गड़बड़ी की राशि ₹4 करोड़ तक आंकी गई है।

जिम्मेदार अधिकारी और शुरुआती कार्रवाई
फरवरी 2023 में तत्कालीन कलेक्टर ने जांच समिति बनाकर रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में तत्कालीन SDM आनंद रूप तिवारी, राजस्व निरीक्षक मुकेश साहू, पटवारी दिलशाद अहमद और जल संसाधन विभाग के कई इंजीनियर व एसडीओ को जिम्मेदार ठहराया गया था ।पटवारी दिलशाद अहमद सबसे पहले निलंबित। राजस्व निरीक्षक मुकेश साहू बर्खास्तगी। SDM आनंद रूप तिवारी जून 2025 में निलंबित। जल संसाधन विभाग के अधिकारी अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं, कुछ सेवानिवृत्त हो गए और कुछ प्रमोट। जल संसाधन विभाग में ईई और एसडीओ स्तर के अधिकारी है। आरएस मिश्रा, शंकर लाल दिवेदी, राजेश प्रसाद मिश्रा, अखिलेश कुमार सुतलाम, पी.एस. नागर, पी.एस. साहू, अनिल त्रिवेदी, एके भारद्वाज, चंद्रमणि सिंह, एआरके नायक , इनमें से तीन अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए, जबकि दो को पदोन्नति मिल गई। किसी पर विभागीय दंड प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।

जल संसाधन विभाग के अफसर क्यों बचे?
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि मुआवजा वितरण की संस्तुति और नक्शा तैयार करने में सीधे तौर पर शामिल जल संसाधन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इनमें कार्यपालन अभियंता से लेकर एसडीओ स्तर तक के अधिकारी शामिल थे। रिपोर्ट में उनके नाम और भूमिका दर्ज होने के बावजूद तीन दोषी अफसर सेवानिवृत्त होकर आराम से घर चले गए। दो अफसरों को पदोन्नति दे दी गई। किसी पर विभागीय दंड प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। परियोजना की स्थिति और बजट शुरुआत में इस परियोजना का बजट ₹606 करोड़ था, जो बढ़कर ₹1,141.90 करोड़ हो गया। लक्ष्य 370.55 किमी नहर निर्माण का था, लेकिन अब तक केवल 229.46 किमी काम पूरा हुआ है। नहर के नक्शे में बदलाव और गलत एलाइमेंट दिखाकर कई जगह अधिग्रहण किया गया, जबकि वास्तविक निर्माण वहां हुआ ही नहीं।

विधानसभा में उठे सवाल
विधानसभा में यह मुद्दा बार-बार उठा। विपक्ष ने तत्कालीन जल संसाधन मंत्री से पूछा कि जब राजस्व विभाग के अफसरों पर कार्रवाई हो सकती है तो जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार क्यों बचाए जा रहे हैं। तत्कालीन सरकार ने जांच का भरोसा दिलाया, लेकिन 2023 में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 2024 के अंत में सरकार बदलने के बाद नई सरकार ने फाइलें दोबारा खोलीं और कुछ अफसरों पर कार्रवाई शुरू हुई।

अरपा-भैंसाझार में 4 करोड़ का मुआवजा घोटाला उजागर हुए दो साल बीत गए है। राजस्व विभाग के तीन अफसर निलंबन/बर्खास्तगी झेल चुके है। पर जल संसाधन विभाग के नामजद 10 में से न किसी पर दंड प्रक्रिया, न केस इसमे कुछ रिटायर, कुछ प्रमोशन पाकर ऊंची कुर्सियों काबिज है। अब देखना यह है कि आखिर कितने सालों में इसकी जांच होती है और कितने साल बाद कार्रवाही उम्मीद है इस सरकार में सुशासन वापस लौटेगा। वरना हालात तो जस के तस बने ही हुए है।